Herbal-Ayurvedic uses of Ashoka Tree

अगर आप कहीं किसी पार्क में घूमने जाते हैं तो वहां पर आपको कुछ हरे रंग के लम्बे वृक्ष एक कतार में लगे दिखाई देते हैं जो पार्क की सुन्दरता में चार चाँद लगाते हैं| इन पेड़ों को अशोक के नाम से जाना जाता है| मगर कुछ लोगों को ही इस बात का पता होगा की पार्क की सुन्दरता के अतिरिक्त हमारे स्वाथ्य की सुन्दरता बढाने में भी इस वृक्ष का बहुत उपयोग है| यह पेड़ लगभग भारत के हर हिस्से में पाया जाता है| इसे मुख्यतः सजावट के लिए लगाया जाता है|

प्रचलित नाम:

अशोक/सीता अशोक

प्रयोज्य अंग:

कांड की छाल,पुष्प तथा बीज

स्वरूप-

यह वृक्ष हमेशा हरा रहता है और इसकी शाखाएँ झुकी हुई होती हैं। पत्र पक्षवत्, संयुक्त जिसमें ३-६ जोड़ी पत्रिकाओं की होती हैं। पुष्प रतवर्णी एवं घनिष्ठ गुच्छों में होते हैं।

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Photo: Ashoka Tree

स्वाद:

तिक्त

रासायनिक संगठन:

इसकी छाल में ग्लायकोसाईड्स, सैपोनिन्स, टैनिन्स, ऐपिजैनिन, सायनीडीन, किम्फे रॉल,कैल्शियम, लोहा, मेद अम्ल तथा गैलिक अम्ल पाये जाते हैं!

 गुण:

ग्राही, उत्तेजक, उद्वेष्टक, रक्त शोधन, शोथन, शीतल।

अशोक वृक्ष के आयुर्वेदिक उपयोग:

मात्रा:

छाल का चूर्ण 10-15 ग्राम

छाल का क्वाथ 30 मि. ली.

पुष्प का चूर्ण 3-6 ग्राम

उपयोग:

रक्त प्रदर, गर्भाशय रोग, मूत्रकृच्छ्र, अश्मरी, हृदयोत्तेजक, कीटाणुघ्र


रक्त प्रदर (Metrorrhagia):

रक्त प्रदर (Metrorrhagia) में इसकी छाल का छीर पाक, प्रातः काल में पिलाते/पीते हैं!

छीर पाक बनाने की विधि:

छीर पाक बनाने के लिए अशोक की छाल का एक चिम्मच चूर्ण, एक कप दूध तथा एक कप पानी लें, आवश्यकता अनुसार शर्करा भी मिला लें, फिर पानी सूखने तक इसे गर्म कर लें| इसका सेवन करने से रक्त प्रदर में लाभ होता है|


श्वेत प्रदर (Blennenteria, Leukorrhea)

स्त्री का मासिक धर्म आने पर कभी-कभी कुछ कारणों से उन्हें श्वेत प्रदर रोग हो जाता है, जिससे योनी से सफ़ेद पानी निकलता है, जिससे स्त्री का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है|

  • अशोक वृक्ष द्वारा इसका उपचार :
  • आंवल, गिलोय एवं अशोक की छाल के चूरन को बराबर मात्र में लेकर उबाल लें |
  • अब ठंडा होने के पश्चात जल को निथार लें|
  • अब इसमें मधु मिलकर प्रातः एवं रात को सेवन करें|

मूत्राघात:

मूत्राघात में इसके बीज के चूर्ण को एक चम्मच जल के साथ सेवन करने से लाभ होता है|


रक्तातिसार:

रक्तातिसार में अशोक के पुष्पों का चूर्ण (एक चम्मच) जल में मिलाकर लेने से लाभ होता है|


गर्भाशय रोगों में अशोकारिष्ट प्रतिदिन (सुबह-शाम ) भोजन पश्चात एक-एक चम्मच लेने से लाभ होता है|

NOTE:
The details are shared for education purpose only and gardenpunjab.com does not aim to treat, diagnose or cure any illness or disease. Consult your doctor before acting this content especially if you are pregnant, taking medicine or have a medical condition.

 

One Response

  1. vimal kumar
    | Reply

    Thank sir have a nice work

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